Tuesday, 28 June 2016

लिफाफे में भूल...!!!(Mistake in an envelop) 28-Jun-2016

सुनो, कल शाम तुम्हे लिफाफे में एक "भूल" भेजी है,
ना जाने कितने महीनों से मेरे पास पड़ी थी , बोझ जैसी,
जब तुम नही थी मेरे पास , तो मीठी मीठी सी लगी थी,
आज नीम कि निबौरी सी कड़वी लगती है!
मैंने उसे अपने पर्स कि चोर जेब में रख छोड़ा था ,
और फिर बहुत कोशिश कि उसे भूल जाने कि ,
पर अब पर्स शिकायत करता है , चुभती है उसे !
अपने पास रखूँगा तो कभी टूटके बिखर जायेगी ,
शायद कुछ टुकड़े तुम्हारे पांव में चुभ जाए कभी,
तुम भी लिफाफे से थोड़ा संभल के निकालना ,
कहीं तुम्हारे आँख का आँसू ना बन जाए वो.
अच्छा सुनो, उसी लिफाफे में एक माफी भी रख छोड़ी है ,
भूल को भूल जाना,और एक आख़िरी बार,
मन के नन्हे मुन्ने कोने में वो माफी रख लेना.




Sunday, 26 June 2016

Remembering you...!!!(23-Jun-2016)