Monday, 8 December 2008

जीवन क्या है कोई न जाने , जो जाने पछताए.....!!

कई बार सोचता हूँ ज़िन्दगी और मौत में से ज्यादा खुबसूरत क्या है ।
ज़िन्दगी या मौत


जिंदगी एक एहसास भर है , शायद एक भ्रम है या शायद एक ऐसी ऐसी सच्चाई , जो सच और झूठ,या भ्रम और परमसत्य की बीच कहीं डोलती है॥


वहीँ मौत एक अंत है या एक शुरआत है॥
एक शुरुआत एक अंत की या अंत एक शुरुआत का...




मुझे लगता है ज़िन्दगी और मौत दोनों ही बहुत खुबसूरत हैं..... सिर्फ़ परेशानी दायक तो वो transitioning period है , जो हमें जीवन से मृत्यु की और ले जाता है ।




उस वक्त न तो हम जब जिन्दा ही होते हैं और मरना तो हम कभी चाहते ही नहीं , बस किसी अदृश्य और गूद फलसफे के सहारे मृत्यु और जीवन के मध्य हिचकोले खाते हैं।


क्या मौत इतनी भयानक होती है,
नहीं मौत आपको जीवन के अस्तित्व का मतलब समझाती है, मौत समझाती है की जीवन का मतलब क्या है




कहा है किसी ने
" ज़िन्दगी से मिल गया , तो भी क्या मिल जाएगा , इससे जिस दिन छूट जायेंगे खुदा मिल जाएगा"

मैं नहीं कहता की "जीने से शिकायत है तो मर क्यो नहीं जाते" बल्कि मैं सिर्फ़ कहता हूँ की " लोग जीते ऐसे हैं जैसे कभी मरेंगे नहीं " ।






क्यो मौत १ डर है , या शायद १ डर भी नहीं , क्योंकि डर उससे होता है जो हमारे सामने होता है , या जिसके कभी न कभी सामने आने का कोई अंदेशा होता है किंतु ये क्या " जब हम होते हैं तब मौत नहीं , और जब मौत होती है तब हम नहीं"




मार्लोन सामुएल बेक्कत के अनुसार


"If i was dead i would not know , i was dead . and that's the only thing against my death.I want to enjoy my death"


तो क्यों न हम हर वक्त अपनी मौत का इंतज़ार करे खुशी के साथ , जाने तब क्या होगा जब कुछ नहीं होगा


और हाँ कभी सोचा है , ज़िन्दगी से आपको मिला क्या,


कमसे कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नही ,
जिन्दगी तुने तो दिया धोके पे धोका



तो ज़िन्दगी को समझने के लिए मौत से प्यार जरुरी है। एक हिन्दी गाने के बोल याद आते है


"ज़िन्दगी तो बेवफा है एक दिन ठुकराएगी , मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जायेगी "




ये तो कुछ बाधाएं मात्र है जो हमें जीवन से प्यार करना सिखाती हैं , क्योंकि समाज जिन्दा व्यक्तिओं का समूह है । और हर समाज अपने जैसे लोगो को तवज्जो देता है , विरलों को नहीं ।


CHARLES LARA की कुछ पक्न्तियन हैं


Death is so permanent
for those who haven’t tried it

Death is too tragic
when destiny shows up early

Death is anything
and everything
like those enjoying wine

Death is a white sky
at night and everything is great
for those who want to imagine

Death is playing banjo
songs without time

Death is a monster movie come alive
for those that have not died

Death has no direction

Death dies out another cigarette

Death is always on vacation

Death rolls the dice
behind whispers of prayers

Death is slow motion

Death is better than sex

Death is good as long as it is somebody else

Death is a sweet symphony
when it ‘s right

मेरे लिए ज़िन्दगी का मतलब वही है जो शायद आपके लिए मौत का है.... क्योंकि मौत भी कही कहीं एक ज़िन्दगी की शुरुआत है


मैं नहीं कहता है आप आत्महत्या कर ले अपितु मैं सिर्फ़ कहना चाहता हूँ , मौत एक श्राप नही वरदान है, और वैसे भी मेरे कुछ भी कहने न कहने से क्या फर्क पड़ता है , क्योंकि एक न एक दिन तो हम सबने मरना है ।


जिंदगी के कई आयाम हो सकता है , कुछ पंक्तियन निम्नुसार हैं
I could go on and on and tell you all about life

But I'm not here to sort this out for you

cuz..
Life is all about you and how you treat it

You criticizes it...well, you're actually criticizing yourself

You like it, you hate it..well, its all up to you

Life is you so be careful how you describe it





लेकिन मौत का सिर्फ़ एक आयाम है " स्वयं मौत"।




so finally don't afraid of death , coz "DEATH" is also "LIFE"


ANUPAM S. Shlok
(ANUPAMISM Rocks)
9868929470, 9619499813

Saturday, 6 December 2008

IN THE SEARCH OF PERFECT WORLD...

कभी कभी लगता है मैं पागल हूँ , क्योंकि ये प्रयास ही व्यर्थ है की मैं कभी भी एक परफेक्ट वर्ल्ड पा सकूँ , एक सामान्य व्यक्ति बनकर मैं रहना नही चाहता हूँ , और महान बनना इतना आसान नहीं । फिर मेरी तलाश का अंत क्या है , शायद कुछ और प्रश्नों का जमावाडा ।

आख़िर ऐसा क्यो हो , की हम अपने संस्कारो को ताक़ पर रख देते है, समाज को ताक़ पर रख देते हैं ।
सिर्फ़ अपनी चंद इच्छाओको पुरा करने के लिए.... और शायद उन इच्छाओ की पूर्ति कुछ और नई इच्छाओ को जनम देती हैं । जो पूर्णतः निषेध होती है ।

मैं मानता हूँ , अपनी इच्छाओ को मारना असंभव है, क्योंकि हम मनुष्य हैं , एक अदद मनुष्य
हम अपनी करना चाहते है , हम ख़ुद को सर्वोपरि समझते हैं । जो शायद हम है भी, मगर फिर भी न जाने क्यो मैं समझता हूँ अपनी कामुक और मादक इच्छाओ को मारा नहीं तो रोका तो अवश्य जा सकता है।

क्यो हम लोग विवाहपूर्व संबंधो और विवाहेतर समंधो में जाने लगें हैं, क्यों हमारे संस्कार हारते जा रहे हैं, क्यों हम अपने जीवन का परमोदेश्य यौन संबंधो को मानने लगे हैं। क्यो हम परमशक्ति के कथन को भुला रहे हैं, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि हमे लगता हैं , हम हमेशा सही है। और हमे अपने दिल की करने का पुरा हक है ।

समाज तो हमें सिर्फ़ एक बंधन सा लगता है , जो हमें हमारी करनी से रोक देना चाहता है....., शायद किसी रुदीवादी व्यक्तिओं का समूह भर मात्र । जो शायद वो है भी ।

ये सारे नियम कानून भी ख़ुद इश्वर द्वारा निर्मित नहीं बल्कि किसी व्यकी विशेष या व्यक्ति समूह ने ही बनाये हैं। फिर हम इनका पालन क्यो करें?

उत्तर सिर्फ़ यही हो सकता है की समाज को सही ढंग से चलने के लिए इनका पालन परमावश्यक है ।

चंद लोगों की मानसिक विकृति पूरे समाज को हताहत कर रही है... जिसके लिए हम तैयार नहीं हैं ।

दिन ब दिन अपराध बाद रहे हैं... हर व्यक्ति तार्किक हो गया है , बुद्धिजीविता का परिचायक हो गया है...


ये सब देख देख के मैं पागलपन के नए सोपानों पर पहुँच रहा हूँ ।

शायद मैं रुदीवादी हूँ , जो बदलावों को नहीं देख पा रहा है, या शायद मैं दूरदर्शी हूँ जो आने वाले भविष्य
से अवगत है

जो दुनिया को आने वाले प्रलय से बचाना चाहता है । आप लोगों का साथ चाहता हूँ । और इस क्रान्ति , जो अपने संस्कारों और संस्कृति को बचाने के लिए है, को नाम देता हूँ अनुपमिस्म (Anupamism)

Regards- Anupam Sharma (9868929470)
(Anupamism Rocks)