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Friday, May 2, 2014
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जब तक जीवन, तब तक संघर्ष। (1-Oct-2022)
हा जीवन , तुम संघर्ष; मुझ दीन की व्यथा का व्यंग बनाते तुम , मृत्यु शैय्या पर स्वप्न दिखाते तुम , नित्य हृदय छेदन , नित्य चरित्र ह्रास, जब तक...
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तुम्हे देखता हूँ .....!(24-Mar-2008) तुम्हे देखता हूँ, और फिर तुम्हारे आसपास देखता हूँ.... हाँ नफरत करता हूँ..... बहुत नफरत करता ...
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हा जीवन , तुम संघर्ष; मुझ दीन की व्यथा का व्यंग बनाते तुम , मृत्यु शैय्या पर स्वप्न दिखाते तुम , नित्य हृदय छेदन , नित्य चरित्र ह्रास, जब तक...
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ना जाने कौन सी ताक़त है,जिसने मेरे विचारों को, मेरी भावनाओं को सक्षम बना दिया है. इतना सक्षम की मैं कह सकूँ की तुम ही हो जो मेरी हर सोच, ...

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