Monday, 10 February 2014

बदलते एहसास ......!!!!





मेरे घरों के तालो का कुछ चोर बेनागा हिसाब रखते हैं ..
ये कलयुगी बगुले हैं , हंस मारके मोती निगलने की चाह रखते हैं ...
कुछ छिछोरे व्यंग उपदेश लगते थे हमको गीता का..
कटघरों में खड़ी हैं राधाएँ आज, सब कृष्ण दोधारी नक़ाब रखते हैं...!!(27- Nov-2013)


क्या लिख डालूं की तुझे महसूस हो दर्द-ए-उलफत करीने से..
हर हर्फ का असर यूँ हो की खून निकले तेरे भी सीने से..
आके देखे मेरे बसेरे पे बसेरा आज बाजो-चीलो का है...
रोशनी खफा है मेरे आँगन से , सिर्फ़ अंधेरा झाँकता है जीने से.!!(20-Nov-2013)

बहुत देखे थे तुझ जैसे बदन को नोचने वाले...
बहुत देखे थे तुझ जैसे बदन गोरे पर दिल काले...
तेरी आयद को सबसे जुदा , था मेहरे- खुदा माना ..
फफोले पड़ गये है अब लबों पे , दिल पड़े छाले..!!!(15-Nov-2013)


फन उठाते सान्पो को आस्तीनो में छुपाया मैने..!!
अंधेरो के माथो पे , सुर्ख सिंदूर लगाया मैने...!!
मरते मरते भी , गंगाजल नही शराब माँगी..!!
बड़ी तरकीबों से तेरा नाम भुलाया मैने...!!(11-Nov-2013)


पेशानी के पसीने को पानी समझ लिया...
मेरे चुप रहने को मेरी नादानी समझ लिया...
राहे उल्फ़त का जनाज़ा ज़रूर उठा था उस रात...
जब उदुन के बाशिन्दो को मैने "ज्ञानी" समझ लिया...!!(9-Nov-2013)


रोशनी के गर्म थपेड़े , आँख बंद कर लेने से थमे हैं कहीं???
कुछ पन्ने फाड़ लेने से जिंदगी की किताब बदली है कहीं??
कुछ नही बदलता...कुछ भी नही... सिवाय.....
रिश्ते..कुछ टीस के साथ ही सही..रिश्ते बदल ही जाते हैं....!!(29- August-2013)


ये जो उनी स्वेटर सी उलझी गमगीन तनहाईयाँ थी वीरान अंधेरों में दुबकी दुबकी..!!
इनसे कह दो की सरगोशियाँ मिली हैं हमें, इश्के-गरमाइयाँ मिली हैं हमें...!!(1-July-2013)


मैं बिक रहा हूँ टुकड़ा टुकड़ा होकर...
खरीददार मिले तो, बिना मोल बिक जाऊं..
बेखौफ समंदर तो हूँ मैं अविरल , अनंत...
तू इशारा कर तेरी पलकों में छिप जाऊं...!!!(3-May-2013)


देखो तो मेरे मकान की छत का एक कोना गायब है दोस्त...
शायद कल तूफान ज़ोरों से बहुत आया है...
अरे गायब तो वो मनी प्लांट की बेल और वो तुलसी का पौधा भी है ,
जो तब लगाया था जिस दिन देखा था उसे पहली बार..!!!(6 -Nov-2013)

उसके हिस्से से मेरी बदसलूकियाँ छीन कर , मैने उसे किसी और के नाम लिख दिया ....!!!!(25-March-2014)

जो जिंदगी होता है , उसको ढूंढने  में जिंदगी लग जाती है  कई बार !!!(3-Apr-2014)



Anupam S "Shlok"
anupamism@gmail.com
8447757188

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