Friday, 5 June 2009

सादिया

सादिया ने फिर मोबाइल की तरफ़ देखा , वो चाहती थी की वो मोबाइल की तरफ़ न देखे , पर अब वो निर्णय नही ले पा रही थी , की कौन सी चाहत उस पर ज्यादा हावी है।

16 वीं बार उसने मोबाइल को उठाया , ओर वही मेसेज पड़ने लगी , जो वो पिछली 15 बार पड़ चुकी थी , केवल तीन ही शब्द तो लिखे थे " I LOVE YOU " और भेजने वाले का नाम लिखा था "अंकुश"

एक मेसेज ही तो था , मगर वो उसे अन्दर तक झकझोर रहा था , हर बार की तरह उसने मोबाइल फिर किनारे रख दिया , और तभी घड़ी ने रात के दो बजाये । वो सोचने लगी , मगर वो ये भी नही जानती थी की उसने सोचना क्या है।

जब से वो कुछ समझने लायक हुई थी , तब से वो सिर्फ़ एक ही चीज़ वो जानती थी , की वो अंकुश से बहुत प्यार करती है। अंकुश सक्सेना , उसका पड़ोसी ,उसका क्लासमेट , उसका एकमात्र दोस्त , उसके लिए उसका सबकुछजिसे वो कब से चाहती थी , वो ख़ुद भी नही जानती थी। जिंदगी में किसी का नाम लेकर वो आह भरती थी तो वो अंकुश ही तो था ।

उसने कभी नही सोचा था की वो " सादिया मुश्ताक " है , और वो "अंकुश सक्सेना"

वो तो उसके लिए समाज को भी छोड़ सकती थी , पर .....पर वो एक लड़की थी ,और वो अपनी अपनी मोहब्बत का इज़हार कभी ख़ुद नही कर पायी थी .....वो जानती थी अंकुश भी उसे चाहता था , पर...पर न जाने क्यो उसने भी कभी सादिया से कुछ नही कहा था ।शायद सदिया कि तरह वो समाज से लड़ने कि हिम्मत नही रखता था।


और आज उसने ये मेसेज किया था " I love You", आज जबकि कल उसका निकाह है आसिफ के साथ । सादिया ने कभी ख़ुद को इतना बेबस महसूस नही किया था। आख़िर कब तक इंतज़ार करती वो , इंतज़ार भी उसका जो शायद कभी होना ही नही था।

सादिया उठी फ्रिज से उसने एक घूँट पानी पिया और फिर आक़र लेट गई ....."क्या करूँ मैं "....." क्या अंकुश के साथ भाग जाऊं'...."या फिर अम्मी या अब्बू से बात करूँ "...." या फिर आसिफ से कह दूँ".......इसी उधेङबुन में उसे कब नींद आ गई उसे पता ही नही चला ।

सुबह 6 बजे अंकुश का मोबाइल बजा , उसने देखा सादिया का मेसेज आया था। लिखा था " तू हिंदू है और हम मुसलमान अगर तूने कभी सादिया कि तरफ़ आँख उठाकर भी दुबारा देखा तो तुझे काट के फेंक देंगे। " भेजनेवाला " सादिया का भाई असलम "

उधर सादिया गुमसुम अकेली बैठी थी , उसने मोबाइल उठाया और Sent Message से ये मेसेज डिलीट कर दिया । फिर INBOX में आक़र अंकुश का मेसेज " I LOVE YOU " एक आखिरी बार पढा़ और उसे भी डिलीट कर दिया ..उसकी आँखों में आंसू थे ।



Regards
Anupam S.
(SRC 2009)
9757423751
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