Thursday, 9 January 2014

कवि सम्मलेन का वर्णन.....!!!( 1-May-2002)


करुण कविता के पश्चात हास्य का नंबर आया ,
तो अध्यक्ष के सेक्रेटरी ने अध्यक्ष को हमारा नाम सुझाया ;
जनता के आँखों से मोती रुपी अश्रु  गिर रहे थे ,
सहायक जन अध्यक्ष के बगल में रूमाल लेके खड़े थे ;
ऐसे में हास्य कविता ऊंट के मुंह में जीरा प्रतीत होती ;
हमारी कविता सुनकर जनता दीदे फाड़ के रोटी ,
फिर भी हमने आदेश माना , सुनाने लगे कविता ,
कविता कुछ इस प्रकार की थी ;


जूते के बग़ल में पड़े थे मौज़े हमारे ,
सूंघते ही बेहोश हो गए "सारे के सारे" ;
हमारा सौभाग्य कि पालतू पूसी ले गयी मुंह में दबाके ;
मानो बिल्ली चली हो हज़ को ८० चूहे खाके ;
बदबू का कारण बदतमीज़ी पूसी कि थी ;
पेट ख़राब होने पर भी मौज़ों के ऊपर बैठी थी ;
होश आने पर लोगों का गुस्सा हमारे पर था ;
बोले जहाँ बैठे थे वो शौचालय  नहीं घर था ;
उन्हें क्या पता ये पूसी का  काम है,
कवि जगत में "अनुपम" का कितना बड़ा नाम है ;
बात को ६ वर्ष हो गए मगर "सारे" घर नहीं आये ,
नयी कविता के भी उन्होंने "रसगुल्ले" नहीं खाये ;
पूसी को भगा दिया हमने जूते मार के ,
बंद करा दिए "गैप" अपने द्वार के ,
बस यही मौज़ों और पूसी कि कहानी है ,
और ये कहानी "अनुपम शर्मा" की जुबानी है। 


हमारी इस तुच्छ कविता ने रुलाई बंद करायी ,
माईबाप जनता ने वन्स मोर कि आवाज़ लगायी ,
तो इस बार हमने "क्रिकेट मैच " का वर्णन किया ,
मैच कुछ इस प्रकार का था ,

"भारत और पाकिस्तान का मैच था "अनुपम"
शाहिद , सचिन बेकरार थे दिखाने को अपनी सरगम ,
टॉस का समय था , कप्तान सामने खड़े थे ,
वेन्यू टोरंटो था , दोनों के रुख कड़े थे ;
टॉस उछाला गया , सौरभ ने टॉस जीता ;
बगल में खड़ा था , वक़ार नामक चीता ;
सौरभ के जीतते ही , वक़ार ने गुर्राहट लगायी ,
"टॉस फिक्सिंग " है , ये कहके बात बढ़ायी ;
बड़ी मुश्किल से वक़ार को मनाया गया ,
टॉस हारने पर भी उसी से मंगाया गया ,
तो वक़ार ने पहले बल्लेबाज़ी मांगी ,
श्रीनाथ कि प्रथम गेंद ही शाहिद ने हवा में टांगी ,
कैच करने वाला सचिन तेंदुलकर था ,
मगर अंपायर पाकिस्तानी जावेद अख्तर था ,
तो अंपायर ने बॉल को नो बॉल बताया ,
और नो बॉल पे कैच करने के लिए ५ रन का पेनल्टी लगाया ,
२५ ओवर के बाद पाकिस्तान के १११ रन थे ,
दोनों ओपनर  अब तक विकेट पे डटे थे;
अब  बॉलिंग द्रविड़ को दी गयी , उसने कमाल कर दिया ;
पहली ३ गेंदो पर हैट्रिक लेकर धोती को फाड़ के रुमाल कर दिया ;
पाकिस्तानी टैलेंडर  ने कुछ साहस दिखाया ,
तथा स्कोर २७० / ९ तक पहुँचाया ;


पारी भारत की थी २७१ रन बंनाने थे ,
इस बार अंपायर  वेंकटराघवन कुछ जाने पहचाने थे ;
भारत कि तरफ से ओपनर वेंकटेश ने शतक बनाया ,
मगर उसका साथ टैलेंडर सचिन को  छोड़ कोई न दे पाया ;
अंतिम ओवर था ५ रन बनाने थे ,
इस बार जावेद अख्तर के ज़माने थे ;
बॉलर था सोहेब , बैट्समैन था सचिन ;
प्रथम गेंद पर ही रन लिए तीन ,
ओपनर वेंकटेश प्रसाद स्ट्राईक पर आया ,
और उसने आसानी से १ रन चुराया ,
४ गेंद बाकी थी १ रन बनाना था ,
विकेट भी एक था , समर्थको का तराना था ,
अगली गेंद को सचिन ने पुश किया ,
मगर अंपायर ने सचिन को आउट दे दिया ;
आउट होने का काऱण कुछ न बता पाने पर ,
अंपायर ने आउट को नोट आउट कराया ,
ऊँगली उठ जाने को एक छोटी से गलती बताया ;
अगली गेंद सचिन के ऑफ-स्टंप के बाहर पैड पर टकरायी ,
बिना अपील के अंपायर ने फिर से ऊँगली उठायी ;
इस बार अंपायर ने सचिन को एलबीडबल्यू कराया ;
बेईमानी से ही सही किन्तु मैच टाई कराया ;

इस कविता को सुन एक क्रिकेट समर्थक ने हमें ५०० रु पकड़ाये ,
तथा अनुपम शर्मा इस कवि- सम्मलेन में बेस्ट कवि आये ;



अनुपम S "श्लोक "
anupamism@gmail.com
8447757188
1-May-2002






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