Wednesday, 8 January 2014

परीक्षा का भूत.....!!! (6 - Apr- 2002)

वह मनुष्य था या यमराज का दूत ,
स्पष्ट नहीं होता ,  यदि चढ़ा हो परीक्षा का भूत ;
पूर्ण दिवा - रात्रि सोचने में चली जाती है ,
स्वप्न में मात्र कबीर कि जीवनी याद आती है ;
गणित के सूत्र रटना आसान नहीं होता ;
परीक्षा हेतु नक़ल ले जाने वाला शैतान नहीं होता ;
हर माता अपने  पुत्र को समझती है सपूत ,
स्पष्ट नहीं होता ,  यदि चढ़ा हो परीक्षा का भूत ;


इंग्लिश कि स्पेलिंग राइटिंग रांग  हो जाती है ,
लिखना चाहता था ईश्वर (GOD ) मगर कुत्ते (DOG) का एहसास दिलाती है ,
संस्कृत के रूपों में अहं घूमता रह जाता हूँ ,
लट् कि जगह लोठ् , और लोठ् कि जगह लृट् के रूप लिखके आता हूँ ;
फिजिक्स , केमिस्ट्री , बायो में कन्फ्यूजन हो जाता है ,
E = mc2 डार्विन का सिद्धांत नज़र आता है ,
सामाजिक विज्ञान कि तूती केवल घर में बोलती है ;
नंबर नदारद होते  हैं , असल दिखता है केवल सूद ,
स्पष्ट नहीं होता ,  यदि चढ़ा हो परीक्षा का भूत। 


अनुपम S "श्लोक "
anupamism@gmail.com
6-April-2002



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