Saturday, 4 January 2014

इस रात के बाद ....!!!(4th - Jan - 2014)

मिल जाएगा बहाना  तुम्हे इस रात के बाद ,
नया ठौरे ठिकाना तुम्हे इस रात के बाद। 

अटखेलियों कि  रिमझिम बौछारें  थमेंगी अब तो ,
बंजर रहेगी  धड़कन  इस रात के बाद। 

छायी हुयी ये धुंध ,मुट्ठी में जो थी मेरी;
दम मेरा घोट देगी इस रात के बाद। 

जो दोस्त थी हमारी वो बदनसीब गलियां ,
अजनबी सी होंगी इस रात के बाद।  

आंसुओं से शायद , समंदर को भर मैं डालूं ,
ये आग कब बुझेगी इस रात के बाद ;

रोओगी तुम भी हरपल ये बद्दुआ है  मेरी ,
तड़पोगी , खुश न होगी इस रात के बाद। 

सिंदूर ही था बाकी , बीवी तुम्हे था माना ,
बेवा बनी फिरोगी इस रात के बाद। 

छोड़ो "श्लोक" हम भी कातिल कम नहीं हैं ,
पछताएँ शायद हम भी इस रात के बाद। 



अनुपम S "श्लोक "
anupamism@gmail.com
4th- Jan-2014
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