Friday, 3 January 2014

आओ आंसू , थमो नहीं.... !!!!(3-Jan-2014)

आओ आंसू , थमो  नहीं.... !!!!
धो दो ये दाग कि मैं उसका पहला प्यार नहीं ,
या प्यार ही नहीं शायद…??
धो डालो वो वक़्त कि जब मैं उसके संग था ,
धो डालो वो स्पर्श जो महसूस होता था उसकी छुअन पे ;
पर जानता हूँ , तुम एक छिछोरी पानी कि बूँद हो बस ;
कलुषित कलंक को धो न पाओगे।
तुम तो तब भी निकले थे , जब मैं बार बार बिखरा  था ,
क्या प्राप्त किया मैंने या तुमने अब तक।
ये आज का युग है , कलयुग है ;
जब भी तुम आते थे , समझाता था तुम्हे चुपके से ,
ये प्रेम नहीं है माया है , मकड़ी का जाला  सा ;
हाँ दोषी मैं हूँ , पर तुम भी हो , मानोगे न ?
जब मेरी आँख से निकले तुम कोई मूल्य न था ,
उसकी आँख से निकले मैंने तुम्हे ईश्वर माना ;
याद है न , ऊँगली पे लेके पिया था तुम्हे , जैसे गंगाजल ;
तुमने शिकायत भी नहीं कि उसकी तब भी , कि ढोंग है सब ;
चलो छोड़ो , अब जाने दो , उसको जीना है जीने दो ;
जब भी चाहो आ जाना , मेरी आँखों पे छा  जाना ;
प्रण है तुम्हे न रोकूंगा , घर दूंगा , दूंगा सम्मान ;
आओ चले मित्र बन जाएँ , संग रहे सदा ,
आओ आंसू , थमो नहीं …!!!!



अनुपम S "श्लोक "
anupamism@gmail.com
3rd - January 2014

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