Friday, 3 January 2014

कवितायेँ जन्म नहीं लेती....!!!! (3rd-Jan-2014)

कवितायेँ जन्म नहीं लेती ,
पर कविता ने कल रात जन्म लिया।
एक अट्टहास के साथ , कोलाहल के साथ ,
पुऱाने संतरे के पेड़ के नीचे ,
किसी नौसिखिये कवि  कि कलम से।
जिसकी तलाश ही थी , कविता का जन्म।
देखो तो मुस्कुराती हंसी उसके चेहरे पे ,
जैसे कुछ नया चुटकुला सुना हो कोई ;
अब देखना...
देखना कविता का बालक से युवती बनने का सफ़र ,
और फिर कविता बूढ़ी हो जायेगी ,
पर वो मरेगी नहीं , क्योंकि कवितायें मरती नहीं कभी ;
शब्दो के शुक्राणु और भावनाओं के अंडाणु ,
दोनों ही तो अमर हैं , तो कविता क्यों मरेंगी भला ?
ये सहवास ही तो पवित्र है बस ;
जो केवल कविता के जन्म के लिए ही है  ;
किसी भौतिक आनंद के लिये नहीं।
आओ गीत गायें , प्रफुल्लित हों ,
क्योंकि कविता ने जन्म लिया है ,
जबकि कविताएं जन्म नहीं लेती।



अनुपम S "श्लोक "
anupamism@gmail.com
3rd-Jan-2014

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