Wednesday, 18 December 2013

कॉल लैटर ...!!! (13-August-2003)

कागजों के ढेर के ऊपर पड़ा एक कॉल लैटर भी था ;
युवक के सामने , उसकी आँखों के  लक्ष्य पर ;
मेडिकल कॉलेज के लैटर हेड पे ,
उसके प्रवेश को प्रतीक्षरत ;
विद्यालय स्तर तक सर्वश्रेस्ठ था , किन्तु शायद अब नहीं ;
क्योंकि अब जरुरत "अर्थ" कि थी ,
१२ लाख में प्रवेश बिक रहे थे ,उससे मांग १० लाख कि थी।
उसने एक पल सोचा …
कितने मिलेंगे इस मकान के??
शायद ४ लाख में बिकेगा ....  और बाकी ६ लाख ??
और नज़दीक ही बहन  कि शादी है।
इसी उधेरबुन में एक विचार फिर कौंधा ,
क्यों न लोन ले ले.…
कम ब्याज पे शिक्षा लोन।
१ माह भागदौड़ के बाद, १० लाख का चेक हाथ में लेकर
चेहरे पर ख़ुशी के साथ , वापिस घर पहुंचा।
आश्चर्य  लड़के वाले प्रत्यक्ष थे।
लोन कि खबर उन्होंने भी सुनी थी।
और अब विवाह से १० दिन पूर्व
दहेज़ के लिए ८ लाख मांगे थे।
उनको विदा कर फिर उधेड़बुन में डूब गया वो।
अब क्या करे… दाखिला ले या दहेज़ दे दे।
बहन को देगा तो लोन कैसे वापिस करेगा ??
इसे चिंता में उसे नींद ने आ घेरा।
अगली सुबह तैयार होकर वो कहीं जा रहा था।
दबे पांव भारी मन से.… न जाने कहाँ को अग्रसारित था।
अरे !!! ये तो लड़के वालों कि गली है।
और कॉल लैटर ?????
अरे वो तो डस्टबीन में पड़ा है।



अनुपम S "श्लोक"
anupamism@gmail.com

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