Tuesday, 24 December 2013

मैं आज फिर तनहा हूँ...!! (27-Aug-2008)

मैं आज फिर तनहा हूँ...!!
क्या यही माँगा था मैंने ज़िन्दगी से ?
मैंने तो बस आराम चाहा था , तन्हाई नहीं।
फिर क्यों मैं आज फिर तनहा हूँ ??

उन आँखों में घंटो देखता था।,
मेरी ज़िन्दगी केवल ढाई इंच आँखें थी।
लेकिन उन आँखों ने क्या माँगा होगा ?
मेरा साथ ही माँगा होगा शायद।
फिर क्यों मैं आज फिर तनहा हूँ ??

वो रातें , दोस्तों के साथ बीतती थी ,
वो बातें , गम ख़ुशी बांटती थी। 
वो शामें घूमने को होती थी। 
क्या वो मुझसे  दूर जा सकते थे ?? नहीं। 
फिर क्यों मैं आज फिर तनहा हूँ ??

जिंदगी बदल गयी है , मैं बदल गया हूँ। 
राहें बदल गयीं हैं मैं बदल गया हूँ। 
सोच बदल गयी है , मैं बदल गया हूँ 
विश्वास बदल गए हैं , मैं बदल गया हूँ। 
और सच सिर्फ ये कि …… 
मैं आज फिर तनहा हूँ...!!


अनुपम S "श्लोक"
anupamism@gmail.com



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